Sad Shayari




अगर दिल टूट जाए तो मरम्मत हो नहीं पाती,

दोबारा प्यार होता हैमोहब्बत हो नहीं पाती!

 

कमी यारों की हैथोड़ा उमर का भी तक़ाज़ा है,

वही मौसम है पर वैसी तबीयत हो नहीं पाती!

 

ये क़ैद-ए-उम्र है जिसको ज़माना इश्क़ कहता है,

सज़ा पूरी नहीं होतीज़मानत हो नहीं पाती!

 

सुना है दिल के बारे मेंख़ुदा का दूसरा घर है,

तो क्यूँ दिल टूट जाने से क़यामत हो नहीं पाती!

 

ज़ियादा कस के थामो तो भी चीज़ें टूट जाती हैं,

ज़ियादा ध्यान रखने से हिफ़ाज़त हो नहीं पाती!

 

तुम्हारे राज़ ग़ज़लों में ज़माने को बता देते,

मगर हमसे अमानत में ख़यानत हो नहीं पाती!

 

यूँही ‘अल्फ़ाज़’ ने तुमसे वफ़ादारी नहीं छोड़ी,

ख़ुदा पर न यक़ीं हो तो इबादत हो नहीं पाती!

||| अल्फ़ाज़ |||


https://youtu.be/x7mCa5bhqBE


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