जब सफ़र में कोई शाम ढल जाती है!
याद बन के शमा दिल में जल जाती है!

जाने क्या बात है तेरे दीदार में,
मेरी तबियत ज़रा सी संभल जाती है!

जोर क़ुदरत पे इंसाँ का चलता नहीं,
रेत मुट्ठी से आख़िर फिसल जाती है!

तेरे जाने से हम ऐसे बेजान हैं,
रूह जैसे बदन से निकल जाती है!

झूठ की गोलियां सबको मीठी लगीं,
बात सच्ची ज़माने को खल जाती है!

हार मत मानिए, ये तो हालात हैं,
हौसला हो तो क़िस्मत बदल जाती है!

अपनी ज़िद पे जो ‘अल्फ़ाज़’ क़ायम रहे,
वो शमा आँधियों में भी जल जाती है
!

अल्फ़ाज़...

 

आज अपना पता हम लगाने चले!

आज अपना पता हम लगाने चले!


 देखते हैं सफ़र किस ठिकाने चले,

आज अपना पता हम लगाने चले!

 

हम तलातुम की नज़रों में चुभने लगे,

दो किनारों को जब भी मिलाने चले!

 

अपनी जुर्अत को हम आज़माने चले,

आईने से निगाहें मिलाने चले!

 

जाने कितने ही सच हमने झुठला दिये,

झूठ जब एक ज़रा सा छुपाने चले!

 

कैसे कैसे न हमपे निशाने चले,

आज हम जो ज़रा मुस्कुराने चले!

 

आज फिर नए सिरे से वो याद आ गया,

आज फिर नए सिरे से भुलाने चले!

 

हाथ अक्सर जलाकर चले आए हैं,

आग बस्ती की जब भी बुझाने चले!

 

कितना बिकना पड़ेगा, पता चल गया,

आज ‘अल्फ़ाज़’ रोटी कमाने चले!

lll अल्फ़ाज़ lll

 

तलातुम = तूफ़ान, Tumlet

जुर्अत = दुःसाहस, Courage, Valour

Sad Shayari

Sad Shayari




अगर दिल टूट जाए तो मरम्मत हो नहीं पाती,

दोबारा प्यार होता हैमोहब्बत हो नहीं पाती!

 

कमी यारों की हैथोड़ा उमर का भी तक़ाज़ा है,

वही मौसम है पर वैसी तबीयत हो नहीं पाती!

 

ये क़ैद-ए-उम्र है जिसको ज़माना इश्क़ कहता है,

सज़ा पूरी नहीं होतीज़मानत हो नहीं पाती!

 

सुना है दिल के बारे मेंख़ुदा का दूसरा घर है,

तो क्यूँ दिल टूट जाने से क़यामत हो नहीं पाती!

 

ज़ियादा कस के थामो तो भी चीज़ें टूट जाती हैं,

ज़ियादा ध्यान रखने से हिफ़ाज़त हो नहीं पाती!

 

तुम्हारे राज़ ग़ज़लों में ज़माने को बता देते,

मगर हमसे अमानत में ख़यानत हो नहीं पाती!

 

यूँही ‘अल्फ़ाज़’ ने तुमसे वफ़ादारी नहीं छोड़ी,

ख़ुदा पर न यक़ीं हो तो इबादत हो नहीं पाती!

||| अल्फ़ाज़ |||


https://youtu.be/x7mCa5bhqBE