ग़ज़ल

 ये जो मीठी सी तकरार की बात है,

प्यार से कीजिये, प्यार की बात है!

 

लब कहें, लब सुने, बिन कहे सब सुने,

इस तरह बोलिए, राज़ की बात है!

 

तुमसे कैसे तुम्हारी शिक़ायत करूँ,

गाल को चूमती ज़ुल्फ़ की बात है!

 

आप कहते हैं तो जान दे देते हैं,

कैसे काटें भला, आप की बात है!

 

जाने कितनी नमाज़ें क़ज़ा हो गईं,

इश्क़ यूँही नहीं कुफ़्र की बात है!

 

शायरी में मेरी ख़ास कुछ भी नहीं,

दाद देना तेरा, दाद की बात है!

 

बात ‘अल्फ़ाज़’ जो है कहीं भी नहीं,

उनके चेहरे के दीदार की बात है!

||| अल्फ़ाज़ |||


तकरार (Takrār) – वाद-विवाद, नोकझोंक, Argument, Dispute

लब (Lab) – होंठ, अधर, Lips

क़ज़ा (Qazaa) – समाप्त, Omitted,

कुफ़्र (Kufr) – धर्म-विसंगत, धर्मविरुद्ध, Great Sin

दीदार (Dīdār) – दृश्य, नज़ारा, Sight, View, Appearance

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